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1 कुरिन्थियों 10:13 तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने से बाहर है: और परमेश्वर सच्चा है: वह तुम्हें सामर्थ से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन परीक्षा के साथ निकास भी करेगा; कि तुम सह सको॥. "परमेश्वर विश्वासयोग्य है ।
हमें एक महत्वपूर्ण बात सदैव याद रखनी चाहिए कि "परीक्षाऐं " परमेश्वर की ओर से नहीं होती है - यह हमारे ही तीब्र अभिलाषाओं के कारण उतपन्न होती है - किन्तु शुभ सन्देश यह है कि हर परिस्तिथियो में, बुरा या भला, परमेश्वर हमारे साथ रहता है; और जिस तरह इस पद में परमेश्वर ने हमसे वादा किया है, कि वह हमे सामर्थ से बाहर परीक्षा में पड़ने नहीं देगा ।
यह जानना अति आवश्यक है कि हम अपने जीवन में किस तरह के परीक्षाओ का सामना करते है - परीक्षाओ का आरम्भ स्वयं के "अभिलाषाओं" या "आवश्यक्ताओं " से शुरू होता है जो धीरे धीरे "तृष्णा" में परिवर्तित हो जाता है और इसके " नियमित दोहराने" के द्वारा "परीक्षा" का रूप ले लेता है ।
हम "परीक्षा या प्रलोभन" के मूल सूत्र को समझें - क्या ये पैसा, पद, लालच हे ?
परमेश्वर से अपने जीवन के इस भाग की चंगाई के लिए प्रार्थना करें, क्योंकि वही है जो आपको इन परीक्षाओ से स्वतंत्र कर सकता है।
आशीषित बने रहे !!!
j-mupbreakfast.blogspot.in

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