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1 पतरस 4:11 "यदि कोई बोले, तो ऐसा बोले, मानों परमेश्वर का वचन है; यदि कोई सेवा करे; तो उस शक्ति से करे जो परमेश्वर देता है; जिस से सब बातों में यीशु मसीह के द्वारा, परमेश्वर की महिमा प्रगट हो: महिमा और साम्राज्य युगानुयुग उसी की है। आमीन॥ "
"कथनी" और "करनी" दो अलग अलग तत्व हैं, जो हम मनुष्य को समझना चाहिए ।
1 पतरस 4:11 "यदि कोई बोले, तो ऐसा बोले, मानों परमेश्वर का वचन है; यदि कोई सेवा करे; तो उस शक्ति से करे जो परमेश्वर देता है; जिस से सब बातों में यीशु मसीह के द्वारा, परमेश्वर की महिमा प्रगट हो: महिमा और साम्राज्य युगानुयुग उसी की है। आमीन॥ "
"कथनी" और "करनी" दो अलग अलग तत्व हैं, जो हम मनुष्य को समझना चाहिए ।
" कथनी" -- के दो दृष्टिकोण हो सकते हैं, पहला - वचन को अपने मुँह से बोलना - जिससे परमेश्वर का वचन हमारी आत्मा और प्राण को आध्यात्मिक तौर से शिक्षित करेगा और दूसरा - परमेश्वर का वचन को " बोलना" जिसके द्वारा हम दूसरों को आशीषित करते है।
इसी तरह "करनी" के भी दोतरफा दृष्टिकोण हैं, पहला - अपने आप के लिए परमेश्वर के वचन के द्वारा परमेश्वर की सामर्थ को पाना और उसके बाद प्रार्थना के माध्यम से उस सामर्थ की सेवकाई से दूसरों की भलाई करना ।
हमारी रचना और अस्तित्व "देने" और "सेवकाई" के लिए की गई है । अपने जीवन में परमेश्वर की भरपूरी का आनन्द उठाएँ ।
" जो आप बोयेंगे वोः ही काटेंगे ।"


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