BREAKFAST~ July 06, 2017(hindi)


आप से परमेश्वर प्रेम करता है !!!

 2 इतिहास 20:15   "और वह कहने लगा, हे सब यहूदियो, हे यरूशलेम के रहनेवालो, हे राजा यहोशापात, तुम सब ध्यान दो; यहोवा तुम से यों कहता है, तुम इस बड़ी भीड़ से मत डरो और तुम्हारा मन कच्चा न हो; क्योंकि युद्ध तुम्हारा नहीं, परमेश्वर का है।"
युद्ध परमेश्वर का है!!

हम प्रेम करते हैं क्योंकि पहले उसने हमसे प्रेम किया । जब हम स्वीकारे नहीं जाते या प्रेम नहीं किए जाते तो उस अनुभव के कारण दूसरों से प्रेम करना हमारे लिए कठिन बन जाता है । हम सभों के पिछले जीवन के कुछ ऐसे दर्द, कड़ुवे अनुभव या कटु बातें होती है जो हमारे भावनाओं को ब्यथित ( अशांत ) करती हैं, जो अन्त में स्वयं ही की आलोचना का कारण  बन जाती है । यह अनुभव ही मुख्य कारण है जो न तो हमे परमेश्वर के प्रेम को समझने देता है, न ही हम दूसरों से प्रेम कर पाते हैं । जब ऐसे दो ब्यथित (अशांत ) ब्यक्तियों की शादी या मित्रता होती है तो उनकी असुरक्षा की भावना या अनुभव आपसी निर्मल प्रेम के आदान प्रदान में रुकावट पैदा करता है - बल्कि ऐसी भावनाओं के बीच की लड़ाई में रिश्ते  दांव पर लग जाते है।
ऐसे अनुभव और भावनाओ से कैसे छुटकारा पाएं ?
आइए हम 2 इतिहास 20:15 से सीखें कि परमेश्वर अपने चुने हुए लोगों को क्या बताना चाहता है ।
"यहूदी" का अर्थ है " प्रशंसा करना ", "यरूशलेम" का अर्थ - शांति की प्रतिज्ञा " या सम्पूर्णता , "यहोशापात" का अर्थ है - परमेश्वर न्यायी है ।
1  आप उनके प्यारे और चुने हुए लोग ( यहूदी ) हैं ।
2  परमेश्वर ने हमें एक कीमत चुका कर मोल लिया है - उसने क्रूस पर जान दी की हम शान्ति, स्वास्थ्य , समृद्धता और सम्पूर्णता का जीवन पाएं (" यरूशलेम ") । परमेश्वर हमें " यरूशलेम के रहनेवालो " कह कर सम्बोधित करता है अर्थात हम सारी आशीषो  के हकदार है वह हम में वास करती है । हमें सम्पूर्णता का जीवन दिया है ।
3  "यहोशापात" का अर्थ है - परमेश्वर न्यायी है । उसने हमें राजा यहोशापात कहा है जिसका अर्थ है कि परमेश्वर की धार्मिकता हमारे लिए स्वाभाविक ब्यवस्था है , जो पहले ही से हमारे दिलों में लिख छोड़ी है । प्रभु यीशु के लहु द्वारा हमारा न्याय पहले ही से हो चुका है । हम ग्रहण किए जा चुके हैं ।
4 आपके सभी दर्दों और परिस्थितियों में - परमेश्वर यह सुनिश्चित करता है कि जो बातें हमें अशान्त करतीं हैं, उससे हम न डरें , न चिंतित हों , क्योंकि हमारे युद्ध परमेश्वर स्वं लड़ता है ।
अपने जीवन में उसके भरपूर प्रेम का अनन्द उठाएँ और शान्त रहें क्योंकि आपके जीवन के सभी युद्ध परमेश्वर के है ।
आशीषित बने रहे !!!

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