BREAKFAST~ July 17, 2017(Hindi)

आप सुंदर है !!!
उत्पत्ति 1:27 "तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया, नर और नारी करके उसने मनुष्यों की सृष्टि की।"
इस सप्ताह हम अस्तित्व के महत्व पर ध्यान केंद्रित करेंगे । हम कोई साधारण प्राणी नहीं हैं, ना ही कोई साधारण जीवन जीने के लिए उत्पन्न हुए हैं । किन्तु हम एक संतुष्ट जीवन, स्वतंत्र जीवन जीने के योग्य बनाए गए हैं । क्या आपने उत्पत्ति 1:27 ध्यान से पढ़ा - जो आपके बारे यूं कहता है कि " आप परमेश्वर के स्वरुप में रचे गए हैं"।
 
आप क्या सोचते हैं कि परमेश्वर का स्वरुप कैसा है ?
 
आपकी जीवन-शैली यह बताती है कि आपका दृष्टिकोण, परमेश्वर के स्वरुप के प्रति क्या है ।अगर आप यह मानते हैं कि परमेश्वर आपके अच्छे (सुन्दर) कामों को देख कर प्रभवित होतें हैं तो आप परमेश्वर को अपने कामों द्वारा प्रसन्न करने वाला जीवन जियेंगे । अगर आप यह सोचते हैं कि परमेश्वर क्रोध करने वाला है तो आप एक भययुक्त जीवन जियेंगे । अगर आप यह अनुभव करते हैं कि वह प्रेम करने वाला परमेश्वर है तो आपका जीवन आत्मविश्वास से भरा होगा ।
पिछले स्तम्भ (Blog) में हमने विस्तार से जाना कि परमेश्वर हमसे कितना प्रेम करता है- कि प्रभु यीशु के द्वारा उसने पापों की छमा दी और हमें धर्मी ठहराया । याद रखें, परमेश्वर आपसे प्रेम करते हैं, और उसने अपने स्वरुप में हमें बनाया - इसलिए आप कोई साधारण प्राणी नहीं, परन्तु परमेश्वर द्वारा रचे गए हैं - और अगर आप परमेश्वर द्वारा रचे गए हैं - तो आप में कोई दोष नहीं, आप बिलकुल उत्तम और सुन्दर रचे गए हैं ।
एक सवाल पैदा हो सकता है कि अगर परमेश्वर ने मनुष्यों को अपने स्वरुप बनाया तो लोग कभी कभी अंधे, लंगड़े या किसी और रूप से विकलांग जन्म कैसे होते हैं ! पाप हमारे जीवन को भ्रष्ट करता है । हमारी लापरवाही उसे बढ़ावा देती है, खान-पान, अनुवांशिकी (genetics), रहन-सहन इत्यादि भी प्रभावित करते हैं । ऐसे लोगों के बहुत उदाहरण है जो  विकलांग या असामान्य होने  के बावजूद एक खुशहाल जीवन जीते हैं ।   यह इसलिए कि जो जीवन और सुन्दरता परमेश्वर ने उन्होंने दिया है, वे उसे स्वीकार कर  लेते हैं । यदि वे स्वीकारते हैं तो,  आप अपने आप को  देखे, उस सुन्दरता का अनन्द उठाये , जो परमेश्वर ने आपको दिया है। 
 
और हां - यह नारी के लिए भी पुष्टि करता है कि आप भी परमेश्वर के स्वरूप मैं रचे गए है - क्योंकि लिखा है कि नर और नारी करके उसने मनुष्यों की सृष्टि की।
 
 आशीषित बने रहे !!!
 

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